एक कड़वा सच बोलूँ? बुढ़ापे में आपकी सबसे अच्छी दोस्त आपकी औलाद नहीं, आपका 'बैंक बैलेंस' होगा।
भारत में रिटायरमेंट के लिए दो सबसे लोकप्रिय स्कीम्स हैं - EPF और PPF। लेकिन ज्यादातर लोग इन दोनों में कंफ्यूज रहते हैं। आज हम बहुत आसान भाषा में इनका अंतर समझेंगे ताकि आप सही जगह पैसा लगा सकें।
1. EPF (Employee Provident Fund)
यह सिर्फ नौकरीपेशा लोगों के लिए है।
- अगर आपकी सैलरी से हर महीने PF कटता है, तो वो यही है।
- फायदा: इसमें आपकी सैलरी का 12% कटता है और ठीक उतना ही (12%) आपकी कंपनी भी मिलाती है। यानी डबल फायदा!
- ब्याज: इस पर सरकार सबसे ज्यादा ब्याज (लगभग 8.25%) देती है।
2. PPF (Public Provident Fund)
यह सबके लिए है (दुकानदार, किसान, स्टूडेंट, हाउसवाइफ)।
- इसे आप किसी भी बैंक या पोस्ट ऑफिस में खुलवा सकते हैं।
- लॉक-इन पीरियड: इसमें पैसा 15 साल के लिए लॉक हो जाता है। आप इसे बीच में नहीं निकाल सकते (कुछ शर्तों को छोड़कर)। यह जबरदस्ती की बचत है जो आपको अमीर बनाती है।
- ब्याज: लगभग 7.1% (हर तिमाही बदलता रहता है)।
3. टैक्स का जादू (EEE)
दोनों स्कीम EEE कैटेगरी में आती हैं। यानी:
- पैसा लगाने पर टैक्स छूट।
- ब्याज पर कोई टैक्स नहीं।
- मैच्योरिटी पर मिलने वाले पूरे पैसे पर भी कोई टैक्स नहीं (100% Tax Free)।
निष्कर्ष (Conclusion)
अगर आप नौकरी करते हैं, तो EPF बेस्ट है। लेकिन अगर आप बिजनेस करते हैं या खेती करते हैं, तो आज ही अपना PPF खाता खुलवाएं। साल का 1.5 लाख तक जमा करें और बुढ़ापे को सुरक्षित करें।
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